गर उलझा था तो सुलझा सकते थे तुम्हारे हाथ में भी तो रिश्तों का कोई तो सिरा होगा गर उलझा था तो सुलझा सकते थे तुम्हारे हाथ में भी तो रिश्तों का कोई तो सिरा होग...
कविता लिखना भीवैज्ञानिक खोज सेकुछ कम नही है कविता लिखना भीवैज्ञानिक खोज सेकुछ कम नही है
तो समझिये बस निकट ही है सुख की भोर ! तो समझिये बस निकट ही है सुख की भोर !
बुन लूँ उमंगों की चूनर, लगा लूँ माथे से धरा। बुन लूँ उमंगों की चूनर, लगा लूँ माथे से धरा।
बातें हजार कर रहे हैं जानते हैं तुझसे प्यार कर रहे हैं। बातें हजार कर रहे हैं जानते हैं तुझसे प्यार कर रहे हैं।
हाँ यही है वो ख़ास एहसास हाँ यही तो प्यार है। हाँ यही है वो ख़ास एहसास हाँ यही तो प्यार है।